विभिन्न देशों के किस्सें

विभिन्न देशों के किस्सें

३ केस / ३ विभिन्न तरीके :

    ३ देश के केस आपको तीन अलग अलग तरीके से दिखाएंगे कि कैसे गैरशजिम्मेवार शस्त्र तबदिलियां सशस्त्र हिंसा को भडकाती है और विकास के कार्य में रूकावट पैदा करती है ।

  1. अवोश इन आर्म्स, बुरुन्डी सशस्त्र हिंसा और हिंसा के अन्य रूप से संघर्ष कर रहा है जिसके कारण राष्ट्र के आर्थिक विकास पर बूरा असर हो रहा है और देश सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य (एमडीजी) को पाने में असमर्थ हो रहा है ।
  2. भारत भ्रष्टाचार से जूज रहा है । जो पैसे शस्त्रों की सौदेबाजियों में फालतु तरीके से खर्च हो रहे है उस वजह से विकास के लिए सरकारी पैसे काफी मर्यादित हो जाते हैं ।
  3. शस्त्रों से सुसज्ज उग्रवादी और अर्धलश्करी बल के कारण कोलम्बिया के नागरिक मूलभूत मानव अधिकारों से वंचित हो गये हैं और समुदाय को गरीबी में धकेल रहे हैं ।

१) बुरुन्डी

बुरुन्डी ने एक लम्बी घरेलू लडाई का अनुभव किया है । १९९३ में छीडी गई जंग में ३००,००० लोग मारे गये हैं और कम से कम १० लाख लोग विस्थापित हुए हैं । आखिरकार २००६ में युद्धविराम पर दस्तखत हुए । २००७ में ओक्सफाम, आईएएनएसए और सेफरवर्ल्ड के द्वारा किये गये शोध ने इस संघर्ष का कुल खर्च ५.७ बिलीयन डोलर बताया है । बुरुन्डी में अभी भी गुन्हेगार और राजनीतिक हिंसा चालु है और १ लाख छोटे हथियार अभी भी गैरकानूनी रूप से घुमते हैं ।

Photo: Brandon Thiessen

बुजुम्बुरा रुरल, बुबान्झा और सीबीटोके विस्तार जिसके सीमा कोन्ग प्रजासत्ताक गणतंत्र से मिलती है वहां शाला और मेडिकल फेसीलीटी खत्म हो चूकी है और हजारों स्कूल आयु के बच्चे को जबरदस्ती बाल सैनिक बनाया जाता है । काफी बच्चे उनके परिवारों के साथ भाग गये हैं । बुरुन्दी के शिक्षा मंत्री के २००६ के रिपोर्ट में यह बात बताई गई है कि १०००० बच्चे इन इलाकों में स्कूल से बाहर है जहां एफएनएल के उग्रवादी जूथ सक्रिय हैं ।

बुरुन्डी के आरोग्य के आंकडे दुनिया के सबसे खराब आंक में है । हर १०० में से एक से ज्यादा बच्चे और हर २०० मां में से १ प्रसूति दौरान मरते है । इसका प्रमुख कारण यह है कि युद्ध के दौरान आरोग्य सेवाओं का सफाया हो चूका है और सक्रिय सशस्त्र हिंसा के कारण बची कुची आरोग्य सेवा भी काम में नहीं आ पा रही है । २००६ के युद्धविराम के बाद हिंसा के कारण हुए जख्मों के इलाज पर ७५ प्रतिशत खर्च हो रहा है । सरकार आरोग्य सेवा में सिर्फ ५ डोलर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष का खर्च उठा रही है वहां आरोग्य व्यवस्था को औंसत १६३.२८ डोलर का खर्च शस्त्र से हुए हर एक जख्म पर करना पडता है ।

बुरुन्डी एमडीजी के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के रास्ते पर नहीं है । लेकिन मुफ्त प्राथमिक शिक्षा एवम् बच्चे के जन्म समय आरोग्य सुरक्षा तथा पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे की सुरक्षा के तत्कालिन वचनों से बदलाव की आश संभवित लग रही है ।

हालांकि यह प्रतिबद्धताएं सिर्फ तभी असरकारक हो सकती है जब बुरुन्डी सशस्त्र हिंसा को कम करें और युद्ध को फिर से आने से रोके ।

२) भारत

२००० और २००७ के बीच भारत बडे शस्त्रों के तबदिलियों में ७.५ प्रतिशत योगदान के साथ दुनिया का दूसरे क्रमांक का सबसे बडा शस्त्रों का आयाती देश था । २००५ में देश का केन्द्रीय जांच आयोग (सेन्ट्रल ब्यूरो ओफ इन्वेस्टीगेशन – सीबीआई) विभिन्न ४६ केस में शस्त्रों की सौदेबाजियों में हुए भ्रष्टाचार की खोज कर रहा था ।

२००४ से सत्ता पर आई युनाईटेड प्रोगेसिव अलायन्स सरकार ने दलाली की प्रक्रिया को दुरुस्त करने के कदम उठायें हैं । रक्षा मंत्री ए. के. एन्थोनी भ्रष्टाचार के विरुद्ध नियम लाना चाहते है, स्वतंत्र मोनिटर नियुक्त किये गये है जो कि तमाम बडे सौदेबाजी का ध्यान रखेंगे और दलाली की प्रक्रिया को बहेतर बनाने के लिए ‘इन्टीग्रीटी पेक्ट्स’ भी लागू किये गये हैं । भ्रष्टाचार की वजह से कुछ कंपनियों के साथ किये गए शस्त्र सौदें रद्द कर दिये गये हैं और कुछ महत्त्वपूर्ण सौदों पर रोक लगा दी गई है जैसे कि, इझरायल के साथ एयर डिफेन्स सौदा ।

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भारतीय सरकार द्वारा उठाये गये कदम काफी महत्त्वपूर्ण है । भारत विश्व का दूसरे क्रमांक का शस्त्रों पे खर्च करने वाला सबसे बडा देश है और फिर भी गरीबी काफी है । भारत भी एमडीजी के लक्ष्यों को हासिल करने के राह में नहीं आया है और ये असरकारक बदलाव के बिना संभव नहीं है । ये तभी हो सकता है जब चुनावी क्षेत्र के लोग शस्त्रों के बजाय विकास की मांग को प्राथमिकता दे ।

३) कोलम्बिया

यह सिर्फ एक संयोग नहीं है कि जो देश एमडीजी के लक्ष्यप्राप्ति से काफी दूर रह गये है उन सभी देशों में बहुत बडे पैमाने पर मानव अधिकारों का हनन हो रहा है ।

दशकों की लडाई के दौरान कोलम्बिया के ४० लाख विस्थापित लोगो ने गेरीला, राज्य और अर्धलश्करी बल की हिंसा को झेला है । कई अवसरों पर इन्टर अमरिकन मानव अधिकार अदालत ने कोलम्बियन लश्कर और अर्धलश्करी बल के रवैयो को विभिन्न समुदाय के विस्थापन, जमीन, पशुधन और अन्य खोट के साथ जोडा है । अपहरण के डर से निवेश रुक जाता है और विस्थापित लोग क्षेत्र के आधिपत्य के लिए हो रहे विग्रहों में फंस जाते है । मानव अधिकार जूथों ने ९० के अंतिम चरण से लेकर २००० के प्रारंभिक दौर के दौरान छोटे और अत्याधुनिक दोनों शस्त्रों के इस्तेमाल से हुए कई नरसंहारों का दस्तावेजीकरण किया है ।

Photo: Lucas Gath

गैरकानूनी ढंग से कोलम्बिया में सशस्त्र आते है । ऐतिहासिक काले बाझारी ये धंधे को बढावा देती है जब कि खूली सरहदें अवैद्य रूप से आते हथियारों के सिलसिले को बंद करने में नाकामियाब है । कुछ हिस्सों में अर्धलश्करी दल के पास ऐसे हथियार होते है जो सरकारी जथ्थे के साथ मेल खाते हो । यहां पर सवाल उठता है कि क्या ये हथियार राज्य के स्रोत से आये है ।

कोलम्बिया काफी मात्रा में शस्त्र आयात करता है । २००६ में कोलम्बिया ने ४६ मिलीयन अमरिकी डोलर के मिलीटरी हथियार आयात किये थे । कोलम्बिया शस्त्र उत्पादन भी करता है जो कि विदेशी लायसन्स से होता है जैसे कि इजरायल की गलील असोल्ट राइफल ।

एमडीजी के लक्ष्यप्राप्ति की साथ विकास वो सिर्फ राष्ट्र के लक्ष्यांक पाने की बात नहीं हैं । ये व्यक्ति और समुदाय के विकास, आर्थिक-सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों एवम् सुरक्षा को परिपूर्ण करने की बात है । जब शस्त्र लोगो को मारने हेतु, नरसंहार के लिए या डर के साये में लोगो को नियंत्रित करने के लिए उपयोग में लिये जाते है तब वो पूरे समुदाय के लोगो के अधिकार प्राप्त करने की क्षमता को निगला जाते है । सशस्त्र उग्रवादी और अर्धलश्करी बल समुदाय को तबाह कर देते है और भूस्तर पर ही विकास को रोक लेते है । हर एक खून सफल सामाजिक आर्थिक विकास के रास्ते की रुकावट है ।